न्यायमूर्ति चंद्रचूड़ ने कहा, लॉकडाउन के दौरान अदालतों में 18 लाख से ज्यादा याचिकाएं दायर हुईं

न्यूज डेस्क, अमर उजाला, मुंबई
Updated Sat, 25 Jul 2020 05:51 PM IST

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उच्चतम न्यायालय के न्यायाधीश न्यायमूर्ति डी वाई चंद्रचूड़ ने शनिवार को कहा कि कोरोना वायरस की वजह से मार्च से जुलाई माह के बीच लागू लॉकडाउन के दौरान देश भर की अदालतों में 18 लाख से ज्यादा याचिकाएं दायर हुईं।

उन्होंने कहा कि ‘बेहद ही अपवादस्वरूप परिस्थितियों’ में स्थापित की गई डिजिटल अदालतें हमेशा नहीं रहने वाली हैं और धीरे-धीरे भौतिक अदालतें फिर काम करना शुरू करेंगी। नासिक में देश के पहले ‘ई-गवर्नेंस केंद्र’ के डिजिटल उद्घाटन कार्यक्रम के दौरान उन्होंने यह बातें कहीं। न्यायमूर्ति चंद्रचूड़ ने कहा, ‘लॉकडाउन की अवधि के दौरान 24 मार्च से 24 जुलाई के बीच देश भर में 18,03,327 याचिकाएं आईं, जिनमें से 7,90,112 को निस्तारित किया जा चुका है।’

महाराष्ट्र में 2.22 लाख कोर्ट केस
उन्होंने कहा, ‘इस अवधि के दौरान महाराष्ट्र में जिला अदालतों में 2,22,431 मामले आए जिनमें से 61,986 को महामारी के गंभीर साये के बावजूद निस्तारित किया जा चुका है।’ उनके मुताबिक डिजिटल अदालतों की वजह से, संकट के इस दौर के बावजूद न्याय प्रणाली बाधित नहीं हुई। न्यायमूर्ति चंद्रचूड़ ने उन चिंताओं पर विराम लगाया कि डिजिटल अदालतें नियमित अदालतों की जगह ले लेंगी।

उन्होंने कहा, ‘संकट के समय न्याय बाधित न हो इसलिये डिजिटल अदालतों की व्यवस्था लागू की गई थी। लेकिन कभी भी खुली अदालतों में सुनवाई की जगह कोई और नहीं ले सकता…। ये विशेष उपाय थे जिन्हें बेहद ही अपवादस्वरूप परिस्थितियों में लागू किया गया और धीरे-धीरे हम भौतिक अदालतों में सुनवाई की तरफ वापस लौटेंगे।’

उन्होंने कहा, ‘लेकिन इससे पहले कि हम नियमित सुनवाई के लिये जाएं, हमें जन स्वास्थ्य विशेषज्ञों से निर्देशन चाहिए होगा।’

उच्चतम न्यायालय के न्यायाधीश न्यायमूर्ति डी वाई चंद्रचूड़ ने शनिवार को कहा कि कोरोना वायरस की वजह से मार्च से जुलाई माह के बीच लागू लॉकडाउन के दौरान देश भर की अदालतों में 18 लाख से ज्यादा याचिकाएं दायर हुईं।

उन्होंने कहा कि ‘बेहद ही अपवादस्वरूप परिस्थितियों’ में स्थापित की गई डिजिटल अदालतें हमेशा नहीं रहने वाली हैं और धीरे-धीरे भौतिक अदालतें फिर काम करना शुरू करेंगी। नासिक में देश के पहले ‘ई-गवर्नेंस केंद्र’ के डिजिटल उद्घाटन कार्यक्रम के दौरान उन्होंने यह बातें कहीं। न्यायमूर्ति चंद्रचूड़ ने कहा, ‘लॉकडाउन की अवधि के दौरान 24 मार्च से 24 जुलाई के बीच देश भर में 18,03,327 याचिकाएं आईं, जिनमें से 7,90,112 को निस्तारित किया जा चुका है।’

महाराष्ट्र में 2.22 लाख कोर्ट केस

उन्होंने कहा, ‘इस अवधि के दौरान महाराष्ट्र में जिला अदालतों में 2,22,431 मामले आए जिनमें से 61,986 को महामारी के गंभीर साये के बावजूद निस्तारित किया जा चुका है।’ उनके मुताबिक डिजिटल अदालतों की वजह से, संकट के इस दौर के बावजूद न्याय प्रणाली बाधित नहीं हुई। न्यायमूर्ति चंद्रचूड़ ने उन चिंताओं पर विराम लगाया कि डिजिटल अदालतें नियमित अदालतों की जगह ले लेंगी।

उन्होंने कहा, ‘संकट के समय न्याय बाधित न हो इसलिये डिजिटल अदालतों की व्यवस्था लागू की गई थी। लेकिन कभी भी खुली अदालतों में सुनवाई की जगह कोई और नहीं ले सकता…। ये विशेष उपाय थे जिन्हें बेहद ही अपवादस्वरूप परिस्थितियों में लागू किया गया और धीरे-धीरे हम भौतिक अदालतों में सुनवाई की तरफ वापस लौटेंगे।’

उन्होंने कहा, ‘लेकिन इससे पहले कि हम नियमित सुनवाई के लिये जाएं, हमें जन स्वास्थ्य विशेषज्ञों से निर्देशन चाहिए होगा।’

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